26.11.11

क्‍यों नहीं दे रहा डब्‍ल्‍यू.एच.ओ. कैंसर के भारतीय इलाज को मान्‍यता? (Succesfull Treatment of Cancer)


कैंसर के कारण सारे विश्‍व में हर साल 80 लाख लोगों की मृत्‍यु हो जाती है और माना जा रहा है कि वर्ष 2020 तक यह संख्‍या दूनी हो जाएगी।
{Let Us Join Hands To Save Human Lives From Cancer- OPEN LETTER TO W.H.O.}

डी.एस. रिसर्च सेंटर का दावा, सैकड़ों रोगियों के कैंसर का सफल इलाज:
अमेठी, उत्‍तर प्रदेश के स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी अनिल कुमार श्रीवास्‍तव को ब्‍लड कैंसर (एक्‍यूट ल्‍यूकोमिया) होने की पुष्टि टाटा कैंसर अस्‍पताल, मुम्‍बई ने की थी। वहाँ पर 6 माह तक इलाज के बाद भी जब उनकी हालत बिगड़ती गयी और बचने की कोई संभावना नहीं बची, तो डॉक्‍टरों ने 20 जनवरी 1992 को उन्‍हें अस्‍पताल से मुक्‍त कर दिया और कहा कि अब इनकी जिंदगी सिर्फ डेढ़-दो माह ही बची है।

अमेठी लौटने के बाद अनिल के परिवार वालों को वाराणसी स्थित डीएस रिसर्च सेंटर के बारे में पता चला। उन लोगों ने वहाँ से अनिल का इलाज शुरू किया और आश्‍चर्यजनक रूप से अनिल 4 माह में पूर्ण रूप से स्‍वस्‍थ हो गया। 29 मई 1992 को जब अनिल ने मुम्‍बई के टाटा कैंसर अस्‍पताल जाकर पुन: जाँच कराई, तो इस जाँच में भी वे कैंसर से पूरी तरह मुक्‍त साबित हो गये। पिछले 18 वर्षों से अनिल कुमार श्रीवास्‍तव पूरी तरह से स्‍वस्‍थ हैं और अमेठी के स्‍टेट बैंक में कार्यरत हैं!

यह और ऐसे ही सैकड़ों कैंसर रोगियों के सफल इलाज का दावा करने वाला डी.एस. रिसर्च सेंटर खाद्य पदार्थों की पोषक ऊर्जा से विकसित की गयी औषधि सर्वपिष्‍टी से कैंसर का इलाज करता है। रिसर्च सेंटर के प्रमुख वैज्ञानिक प्रो0 शिवशंकर त्रिवेदी का कहना है कि प्राकृतिक मानवीय आहार सामग्रियों में निहित पोषक ऊर्जा प्रकृति और सृष्टिका जीवन नुस्‍खा है। वे बताते हैं कि इसका कोई साइड इफेक्‍ट संभव नहीं है। यही कारण है कि हमारे संस्‍थान से अब तक एक हजार से अधिक लोग कैंसर का सफल इलाज करा कर स्‍वस्‍थ जीवन व्‍यतीत कर रहे हैं।

अमेरिकी वैज्ञानिक ने माना सर्वपिष्‍टी का लोहा:
न्‍यूयार्क हास्पिटल मेडिकल सेंटर ऑफ क्‍वींस के रेडिएशन आंकोलॉजी के क्‍लीनिकल डाइरेक्‍टर तथा वेल मेडिकल कॉलेज ऑफ कोरनेल यूनिवर्सिटी के रेडिशन आंकोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ0 सुहृद पारिख भारतीय मूल के वैज्ञानिक हैं। कुछ समय पहले वे स्‍वयं कैंसर का शिकार हो गये। उनके कैंसर का सफल इलाज डी0एस0 रिसर्च सेंटर ने किया।

प्रो0 पारिख ने इस इलाज से ठीक होने के बाद मुम्‍बई के जुहू स्थिति होटल सी-प्रिंसेसे में एक समारोह आयोजित किया, जिसमें देश के जाने-माने कैंसर विशेषज्ञ डॉ0 एस0एच0 आडवाणीऔर जसलोक अस्‍पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ0 वी हरिभक्ति भी सम्मिलित हुए। प्रो0 पारेख ने इस कार्यक्रम में अपने सफल इलाज की घटना को प्रेस के सामने बताया, लेकिन इसके बावजूद उसे महत्‍व नहीं दिया गया।

07 साल से लटकाए है डब्‍ल्‍यू0एच0ओ0:
सैंकड़ों कैंसर रोगियों के सफल इलाज से उत्‍साहित होकर डी0एस0 रिसर्च सेंटर ने अपने चार सौ से अधिक ठीक किए गये कैंसर रोगियों की सूची (नाम पते सहित) विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यू0एच0ओ0) को (OPEN LETTER TO W.H.O.) भेज कर इस सम्‍बंध में जाँच किये जाने का अनुरोध किया है, जिससे इस सम्‍बंध में सम्‍पूर्ण विश्‍व में कैंसर के सफल इलाज की सूचना जा सके। किन्‍तु पिछले 7 सालों से डब्‍ल्‍यू0एच0ओ0 इस मामले को दबाए बैठा हुआ है। रिसर्च सेंटर का आरोप है कि डब्‍ल्‍यू0एच0ओ0 बहुराष्‍ट्रीय दवा कंपनियों के दबाव में है, जो नहीं चाहती हैं कि बाजार में काई ऐसी सस्‍ती दवा आए, जो कैंसर का नामोनिशान मिटा दे। इससे उनके व्‍यापारिक हितों पर चोट पहुँचेगी।

भारत सरकार भी नहीं ले रही संज्ञान:
रिसर्च सेंटर के प्रमुख बताते हैं कि कुछ साल पहले तक तो लोग यह मानने को तैयार नहीं थे कि भारतीय पद्यति से कैंसर का इलाज संभव है। लेकिन सैकड़ों लोगों के इलाज के बाद अब लोगों को हकीकत समझ में आने लगी है। वे बताते हैं कि इस सम्‍बंध में जानकारी करने के लिए हमारे पास जर्मनी और ब्रिटेन की टीमें आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक न तो किसी भारतीय चिकित्‍सा संस्‍थान ने अथवा सरकार ने उनसे कोई सम्‍पर्क नहीं किया है।

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18 सुधी पाठकों की राय:

Dineshrai Dwivedi ने कहा…

धंधा करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सब जगह कब्जा है, भारत सरकार तो उन के इशारे के बिना कुछ नहीं करती।

Yogesh ने कहा…

क्या और दूसरे प्रकार के कैंसर भी ठीक हो सकते हैं यहाँ से ? या सिर्फ blood कैंसर का ही इलाज करते हैं ये लोग?

Yogesh ने कहा…

Can you please tell us the complete address of D.S.Research center.
वाराणसी स्थित डीएस रिसर्च सेंटर

???

Yogesh ने कहा…

subscribing for e-mails of comments.

Rahul Singh ने कहा…

रोगियों की मान्‍यता अधिक जरूरी है, बाकी सब पीछे-पीछे आ ही जाएंगे.

bhuvnesh sharma ने कहा…

डी.एस रिसर्च सेंटर के बारे मे तब सुना जब मेरी माताजी का कैंसर गंभीर अवस्‍था में पहुंच चुका था...वहां की औषधियां भी ली गईं पर लाभ नहीं हुआ क्‍योंकि बीमारी बहुत अधिक बढ़ चुकी थी...
और जरूरतमंद लोगों को भी इसके बारे में बताया है...
सरकार को मदद करके ऐसे और भी रिसर्च सेंटर खोलने की पहल करनी चाहिए

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 27/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

योगेश जी, रिसर्च सेंटर की वेबसाइट का लिंक पोस्‍ट में जोड़ दिया गया है।

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत ही काम की जानकारी आपने दी है।

दर्शन लाल बवेजा ने कहा…

काम की जानकारी

Bhushan ने कहा…

दिनेशराय द्विवेदी जी की टिप्पणी सही स्थिति बता रही है. शोध चाहे हमारे यहाँ होता रहे, दवा बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बिकेगी जो डब्ल्यू.एच.ओ. के बनाए नियमों के अनुसार हो. ये नियम किसने बनाए हैं और इसका लाभ किसे होगा, आप जानते ही हैं.

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri ने कहा…

बहुत ही उपयोगी जानकारी युक्त आलेख बहुराष्ट्रीय औषधि निर्माण करने वाली कंपनियों के हित प्रभावित होते होंगे इसलिए विशुद्ध भारतीय प्रयास को हतोत्साहित करने की सदियों पुरानी विदेशी चाल ...अफ़सोस हमारी सरकार भी शुध नहीं ली रही ..........डी.एस रिसर्च सेंटर
के वैज्ञानिकों ओर स्टाफ को हार्दिक शुभ कामनाएं.....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत महत्त्वपूर्ण जानकारी मिली ... भरत की सरकार को सोचना चहिये .. इससे देश का ही नम होगा ..

आभार

P.N. Subramanian ने कहा…

हमें भी यही लगा है की बहु राष्ट्रीय कंपनियों के निहित स्वार्थों का हिमायती बन गया है, विश्व स्वास्थ्य संघठन

NISHA MAHARANA ने कहा…

बहुत महत्त्वपूर्ण जानकारी.आभार.

S.N SHUKLA ने कहा…

सार्थक तथा सामयिक प्रस्तुति , आभार.

Vinayak Sharma ने कहा…

माननीय रजनीश जी
नमस्कार
तस्लीम में प्रकाशित विज्ञान पर आधारित रचनाओं को मैं मंडी हिमाचल से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक समाचार पत्र "अमर ज्वाला " में प्रकाशित करना चाहता हूँ. कृपया रचना, लेखन का चित्र ( ऐच्छिक ) व परिचय और समाचार की प्रति डाक द्वारा प्राप्त करने के लिए अपना पता भी मुझे मेल करें.
कृपया अपना ईमेल पता भेजें मई आप को समाचार पत्र के पिछले अंक का लिंक भेजूंगा, देख लीजियेगा.


धन्यवाद !

विनायक शर्मा
सिधिविनयक८१@जीमेल.com
संपादक, साप्ताहिक अमर जवाला
मंडी, हिमाचल प्रदेश

Vinayak Sharma ने कहा…

माननीय रजनीश जी
नमस्कार
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धन्यवाद !

विनायक शर्मा
सिधिविनयक८१@जीमेल.com
संपादक, साप्ताहिक अमर जवाला
मंडी, हिमाचल प्रदेश