सोमवार, 31 अक्टूबर, 2011 को लखनऊ के माल ग्रामीण क्षेत्र में सुबह 7.25 बजे जन्मी अजय यादव एव विनीता की पुत्री नरगिस को प्रताकात्मक रूप में दुनिया की 7 अरबवें बच्चा का दर्जा दिया गया है। माल क्षेत्र में इसे लेकर खुशी का माहौल है। पर ये समय खुशी मनाने का नहीं, सोच विचार का है। क्योंकि आज पैदा हुई ये बच्ची जब 2050 में 39 साल की होगी, उस समय तक विश्व की जनसंख्या 09 अरब तक पहुँच चुकी होगी, जिस कारण उन्हें काफी गम्भीर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना होगा।
दोहा में हाल ही में बैंकरों के एक सम्मेलन में कहा गया है कि वर्ष 2050 तक सम्पूर्ण विश्व के सामने खाद्य वस्तुओं का अभूतपूर्व संकट होगा। इसके अलावा भी अधिकाँश चुनौतियाँ खाद्य क्षेत्र से जुड़ी, मसलन पेयजल, उर्वरक और भूमि की उपलब्धता आदि की होंगी।
सम्मेलन में बताया गया है कि 2050 तक खाद्य संकट काफी गहरा गया होगा। आज के बच्चों को उस दौर में ज्यादा भूख का सामना करना होगा। वे एक दिन के लिए भोजन जुटा लेंगे, तो दूसरे दिन की चिंता उनके दिमाग पर हावी रहेगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि आज भी विश्व की 03 अरब आबादी दो डॉलर प्रतिदिन पर गुजारा करती है और लगभग 01 अरब आबादी को भरपेट भोजन नहीं मिल पाता है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार बढ़त आबादी के अनुसार 2050 तक माँग के अनुसार खाद्य उत्पादन के कम से कम हमें 70 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी लानी होगी। और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो सम्पूर्ण विश्व में भुखमरी की नौबत आ जाएगी।
वर्ष 2050 तक पेयजल की समस्या भी काफी विकराल रूप ले चुकी होगी, जिससे निपटने के लिए सरकारों को काफी संसाधन जुटाने होंगे। इसके साथ ही साथ कृषि कार्यों के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनकर उभरेगी। यदि सरकारों ने इस ओर समुचित ध्यान नहीं दिया, तो खाद्य उत्पादन 20 प्रतिशत तक गिर जाएगा, जिससे खाद्य समस्या और ज्यादा विकराल हो जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के अनुसार 2050 तक गाँवों में संसाधन घटेंगे तथा खेती योग्य जमीन का अधिग्रहण होने के कारण ग्रामीण आबादी का बड़ी मात्रा में शहरों की ओर पलायन होगा। इससे शहरों की भीड़ काफी बढ़ जाएगी और आमजन के सामने शिक्षा और स्थायी नौकरी की चुनौतियाँ मुँह बाए खड़ी होंगी।
| अगर आपको 'तस्लीम' का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ। |
|---|


8 सुधी पाठकों की राय:
विचारणीय पोस्ट .. आज के अखबार में बच्चे की संख्या नंबर पर भी आपत्ति है ..कोई मनीला में हुई बच्ची को कह रहा है कोई रूस में जन्मे बच्चे को तो कोई भारत में जन्मी नर्गिस को .. सही क्या है इसकी सही जानकारी की आपसे अपेक्षा है ..
जनसँख्या वृद्धि के विभिन्न पक्षों पर गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है.
संगीता जी, यह एक प्रतीकात्मक घोषणा है, जो जनचेतना जागृत करने के उद्देश्य से की गयी है। वास्तव में इस तरह की कोई सटीक गणना सम्भव भी नहीं है। इसीलिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसबार प्रत्येक देश को अपना सात अरबवां बच्चा घोषित करने की छूट दी है।
शुक्रिया , इस जानकारी के लिए
जो देश भगवान भरोसे हो वहां ऐसी चिंता नहीं होनी चाहिए?..
दास मलूका कह गये......
स्थिति विस्फोटक है।
जताई गयी चिंता
व्यर्थ ही नहीं है ...
जागने की ज़रूरत है और आवश्यकता भी
मननीय !
देश विदेश में सभी जगह उत्पादन की भरमार है।
यह और बात है कि बहुत से उत्पादन को पूंजीवादी लोग भाव गिर जाने के डर बाज़ार में नहीं आने देते और वह उत्पादन गोदामों में पड़ा सड़ता रहता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी उसे लोगों में वितरित नहीं किया जाता।
उत्पादन पर्याप्त है वितरण व्यवस्था को सही करने की ज़रूरत है।
एक टिप्पणी भेजें