
ओवर द काउंटर यानी बिना डॉक्टर के लिखे बिकने वाली दवाओं में किस्म-किस्म की यौनवर्द्धन दवाओं की बिक्री बहुत तेजी से बढ़ी है। खासकर 35 से 45 की उम्र वालों में इनकी बिक्री ज्यादा है। इसी के साथ ऐसी दवाओं के दुष्प्रभाव से बीमार लोगों की संख्या भी इतनी ही तेजी से बढ़ी है। कम्पनियाँ भले ही दवाओं के साइडइफेक्ट की बात को नकारती हों, पर असलियत में इनके दुष्प्रभाव जानलेवा हो सकते हैं।
ऐसी दवाओं से बीमार होकर कई मरीज अस्पताल पहुँच रहें हैं। सिर्फ लखनऊ के लोहिया अस्पताल के ही मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में सेक्स सम्बंधी समस्या और दवाओं के साइड इफेक्ट के बाद महीने में दो सौ से ज्यादा रोगी पहुँच रहे हैं, जबकि चिकित्सा विश्वविद्यालय ये यूरोलॉजी और मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में हर महीने लगभग 700 रोगी आते हैं। इनमें अधिकतर रोगी दवाओं के साइड इफेक्ट के होते हैं।
25 लाख रूपये का है कारोबार
यौनवर्द्धन दवाओं का कारोबार सिर्फ तीन-चार वर्षों में चौगुना बढ़ गया है। इनमें हर्बल दवाओं की बिक्री सबसे अधिक है। लखनऊ के मेडिकल स्टोर्स में एक महीने में कम से कम 25 लाख रूपये का कारोबार हो रहा है। -विकास रस्तोगी (मीडिया प्रभारी, लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन)
दवा के साइड इफेक्ट
इन दवाओं के कारण आम तौर से निम्न साइड इफेक्ट देखने में आते हैं- सिर में दर्द, चक्कर, चेहरे में सूजन, पेट की खराबी, मधुमेह, ब्लड प्रेशर, उल्टी, खाँसी, अवसाद, अनिद्रा, सीने में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, त्वचा में झुनझुनी, अल्सर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा।
विशेषज्ञों की राय
लोग यौनवर्द्धक दवाओं का अंधाधुंध सेवन कर रहे हैं। इनमें अविवाहितों की संख्या अधिक है। लुभावने विज्ञापन के फेर में युवा गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। लोगों में शारीरिक कमजोरी का भ्रम रहता है और वे विशेषज्ञों के पास जाने के बजाए केमिस्ट के पास जाते हैं। -डॉ0 एस.एन. शंखबार (विभागाध्यक्ष, यूरोलॉजी विभाग, चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ)
छोटी-मोटी समस्या बताने में भी लोग झिझक और शर्म महसूस करते हैं। बस यहीं से समस्या गंभीर रूप लेने लगती है। शुरूआत में बीमारी पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। बिना डॉक्टरी सलाह के दवाओं का सेवन बहुत नुकसानदेह है। -डॉ0 एच.एस. पाहवा, चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ)
आयुर्वेद के नाम पर मीठा जहर बिक रहा है। तथाकथित यौनवर्द्धक दवाओं के सेवन से शरीर में खून का दौरा तेज हो जाता है। हृदय गति तेज होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कई तरह के मानसिक रोगों का खतरा बन जाता है। -डॉ0 देवाशीष शुक्ला (मानसिक रोग विशेषज्ञ, लोहिया अस्पताल, लखनऊ)
आयुर्वेद के नाम का बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है। किसी भी तरह की यौनवर्द्धक दवाओं को बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं लेना चाहिए। खुलेआम बिकने वाली दवाओं से सचेत रहें। -डॉ0 संजीव रस्तोगी (राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, टूडि़यागंज, लखनऊ) (साभार:हिन्दुस्तान)
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9 सुधी पाठकों की राय:
informative post
lack of sex education is the root cause
and my suggestion is that when such posts come we should put pictures related to post like some fake medicine pictures where the racket has been busted
the picture that you have put is symbolic of erotism and is not suitable for such and informative post
agar aap 'fake sex medicine racket busted " google mae daal par search kariyaegaa to aesae hazaro link mil jayegae jinko is post me sammilit kar saktey haen
aur pics bhi
इनके विज्ञापनों पर रोक लगनी चाहिए... अच्छी पोस्ट
बहुत ही ज्ञानवर्धक पोस्ट ..रचना जी ने भी काम की सलाह दी है ..सब कुछ एक सोची समझी तय नीति के तहत हो रहा है
इस दिखावे की दुनिया में इस तरह की औषधि लेना भी दिखावा ही लगता है।
बहुत ही सूचनाप्रद और जागरूक करता आलेख।
लोगों को भ्रम है आयुवेदिक दवाओं के पार्श्व प्रभाव नहीं होते .इनमे स्तिरोइड्स का स्तेमाल आम होता है जिनके ज्ञात अवांछित नतीजे सामने आ चुकें हैं .दिल के इलाज़ के लिए बनी थी व्याग्रा ,नियाग्रा ताकी दिल को निर्बाध खून पहुंचे लोगबाग बिना सोचे समझे पीनाइल आर्तरीज़ में अतिरिक्त खून भेज रहें हैं .समस्या ओवर -इरेक्शन बनता है .और फिर दोड़ो एंटी -इरेक्शन क्लिनिक .
आप सब को विजयदशमी पर्व शुभ एवं मंगलमय हो।
बिना डॉक्टर के पर्चे के इस प्रकार की दवाये नहीं दी जानी चाहिए.बहुत उपयोगी पोस्ट.
तथ्य चैंकाने वाले हैं।
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