16.9.11

मिल गयी दूसरी पृथ्‍वी?

यूरोपीय खगोलविदों ने एक अमेरिकी सम्‍मेलन में, हमारी सौर प्रणाली के बाहर 50 अन्‍य ग्रहों की खोज की घोषणा की है। इन ग्रहों में सर्वाधिक दिलचस्‍प वह ग्रह है, जिसे खगोलविदों ने रहने योग्‍य क्षेत्र या गोल्‍डीलॉक्‍स जोन बताया है। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि यह ग्रह न तो बहुत गर्म है और न ही इतना अधिक ठण्‍डा है कि वहाँ पानी मौजूद न रहे। किसी भी ग्रह मे पानी की मौज्‍ूदगी का मतलब है उस ग्रह पर पृथ्‍वी की तरह जीवन के लिए अनुकूलता। पहले ऐसे गोल्‍डीलॉक्‍स ग्रहों की खोज में केवल एक ही ग्रह का पता चला था। यह खोज 2007 में हुई थी।

नए ग्रह के साथ एक तारामंडल का भी पता चला है। नए ग्रह का द्रव्‍यमान पृथ्‍वी के द्रव्‍यमान की तुलना में 3.6 गुना अधिक है। इस ग्रह में अत्‍यधिक आर्द्रता के साथ तापमान 85 से 120 डिग्री (30 से 50 डिग्री सेल्सियस) हो सकता है। इस अध्‍ययन से जुड़ी, जर्मनी के मैक्‍स प्‍लैंक इंस्‍टीटयूट की खगोलविद लीजा कैटनेजर ने कहा है कि यहां बहुत उमस होगी। हम यह नहीं कह रहे हैं कि यह आपके और मेरे रहने योग्‍य है, लेकिन हो सकता है कि यहाँ जीवन शायद छोटा हो या अन्‍य ग्रहों के प्राणी यहाँ हों। ये प्राणी शायद मानव की तुलना में भूमि के अधिक करीब हों क्‍योंकि पृथ्‍वी जैसे इस विशाल गृह में गुरूत्‍व हमारे ग्रह के गुरूत्‍व की तुलना में 1.4 गुना अधिक है।

खगोलविद मान रहे हैं कि यह ग्रह रहने योग्‍य है। इसका कम से कम 60 फीसदी भाग बादलों से ढ़का है। पृथ्‍वी का करीब 50 फीसदी भाग बादलों से ढ़का है। इसलिए 60 फीसदी असामान्‍य नहीं है। नए ग्रह का नाम एचडी-85512बी रखा गया है। यह उस तारे के वलयों के समीप है, जिसकी दूरी पृथ्‍वी में मौजूद तारामण्‍डल वेला से 35 प्रकाश वर्ष है। एक प्रकाश वर्ष का मतलब प्रकाश द्वारा एक वर्ष में चली गयी कुल दूरी होती है। यह लगभग 5.8 खरब मील होता है।
इस ग्रह में एक वर्ष में 60 दिन होते हैं। जीवन के लिए यह ग्रह अत्‍यधिक गर्म नहीं है और इसका कारण यह है कि इसका सूर्य हमारे सूर्य की तुलना में करीब 1800 डिग्री ठण्‍डा है। इन नए ग्रहों की खोज यूरोपियन सदर्न आब्‍जर्वेटरी से की गयी, जो चिली में है। इस खोज ने बृहस्‍पति जैसे ग्रहों की तुलना में पृथ्‍वी से अधिक मिलते-जुलते द्रव्‍यमान वाले ग्रहों की संख्‍या दोगुनी कर दी है। (जनसंदेश टाइम्‍स से साभार)
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20 सुधी पाठकों की राय:

shikha varshney ने कहा…

बहुत हो गई भीड़ इस धरती पर यारो
चलो किसी और ग्रह पर घर बसाया जाये.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत ही बढ़िया जानकारी ! इस ग्रह के बारे में कैसे पता चला इसके बारे में भी कुछ बताते तो अच्छा लगता ! मतलब इसके वातावरण प्राण के लायक है यह कैसे पता चला ?

सुधाकर अदीब ने कहा…

ज़ाकिर भाई , जानकारी महत्वपूर्ण है , शुक्रिया । इसे सत्ताधारियों से छिपा कर रखिए , वरना वे वहाँ सबसे पहले अन्ना हज़ारे जैसों को भेज देंगे , ताकि उनके पास वहाँ करने को कुछ ना रहे , और इधर भाईलोग निष्कंटक राज कर सकें ।

PRO. PAWAN K MISHRA ने कहा…

दूर के ढोल सुहावने होते है

रविकर ने कहा…

अथ--

सुन्दर

प्रस्तुति |

बधाई,

इति ||

रविकर ने कहा…

सात अरब लोगों का बोझ, अलग दूसरी दुनिया खोज |
हुआ यहाँ का चक्का जाम, बचा लो धरती, मेरे राम ! 1 !

क्राइस्ट-काल का जोड़ा अबतक, पूरा चालीस लाख हो चुका |
पेड़ लगा पाया बस दो ठो, लेकिन चालीस लाख खो चुका |
भीषण युद्ध, क्रुद्ध रोगाणु , सत्यानाशी बीज बो चुका |
सूखा - बाढ़ अकाल सुनामी, जीवन बारम्बार रो चुका||

सिमटे वन घटते संसाधन, अटक गया राशन उत्पादन |
बढ़ते रहते हर दिन दाम, बचा लो धरती, मेरे राम ! 2 !

जीवन शैली में परिवर्तन, चकाचौंध, भौतिकता भोग |
खाना - पीना मौज मनाना, काम- क्रोध- मद- लोभी लोग |
वर्तमान पर नहीं नियंत्रण, कर अतीत पर नव - प्रयोग |
जीव-जंतु का दुष्कर जीना, लगा रही धरती अभियोग||


बढे मरुस्थल बाढ़े ताप, धरती सहती मानव पाप |
अब भूकंपन आठों-याम, बचा लो धरती, मेरे राम ! 3 !

स्वार्थ में अँधा मानव करता, सागर के अन्दर विस्फोट |
करे सुनामी पैदा खुद से, रहा मौत को हरदम पोट |
विकिरण का खतरा बढ़ जाये, पहुंचा रहा चोट पे चोट |
जियो और जीने दो भूला, चला छुपाता अपनी खोट |

हिमनद मिटे घटेगा पानी, कही बवंडर की मनमान |
करे सुनामी काम-तमाम, बचा लो धरती, मेरे राम ! 4 !

बढ़ा रहे धरती पर बोझ, नदियों पर ये बाँध विशाल |
गर्भ धरा का घायल करके, चला बजाता अपने गाल |
एवरेस्ट पर पिकनिक करके, छोड़े करकट करे बवाल |
मानव पर है सनक सवार, ऊँचे टावर ऊँचे मॉल |

जीव - जंतु के कई प्रकार, रहा प्रदूषण उनको मार |
दोहन शोषण हुआ हराम, बचा लो धरती, मेरे राम ! 5 !

कई जातियाँ ख़त्म हो चुकी, कई ख़त्म होने वाली |
मानव अपना शत्रु बन चुका, काट रहा खुद की डाली |
दिन-प्रतिदिन संसाधन चूसे, जिन से धरा उसे पाली |
भौतिक-सुख दुष्कर्म स्वार्थ का, मानव अब गन्दी गाली |

जहर कीटनाशक का फैले, नाले-नदी-शिखर-तट मैले |
सूक्ष्म तरंगो का कोहराम, बचा लो धरती, मेरे राम ! 6 !

गंगा का पानी जुड़ता था, प्रीतम की जिन्दगानी से |
हर बाला देवी की प्रतिमा जुडती मातु भवानी से |
दुष्टों ने मुहँ मोड़ लिया पर गौरव-मयी कहानी से |
जहर बुझी जिभ्या नित उगले, उल्टा-पुल्टा वाणी से |

मारक गैसों की भरमार, करते बम क्षण में संहार |
सूरज सा जहरीला घाम, बचा लो धरती, मेरे राम ! 7 !

आरुषि - प्यारी, कांड निठारी, ममता बच्चे को मारे |
कितने सारे बुजुर्ग हमारे, सिर पटकें अपने द्वारे |
खून - खराबा, मौत - स्यापा, मानवता हरदम हारे |
काम-बिगाड़े किन्तु दहाढ़े, लगा जोर जमकर नारे |

मानव - अंगों का व्यापार, सत्संगो का सारोकार|
बिगढ़ै पावन तीरथ धाम, बचा लो धरती, मेरे राम ! 8 !

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

सैल जी, यह समाचार बुधवार के जनसंदेश टाइम्‍स में प्रकाशित हुआ है। मैंने उसे ज्‍यों का त्‍यों यहां पर प्रकाशित कर दिया है।

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

यह समाचार हिदुस्तान दैनिक समाचार पत्र में पढ़ा था
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अब चाहे जितने भी प्रथ्वी जैसे ग्रह मिलें ... हम इतने कुशल और प्रतिभा संपन्न हो चुके हैं कि सबको प्रथ्वी जैसा बनाकर उसकी वाट लगा सकते हैं

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत ही बढ़िया जानकारी !

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अच्छी जानकारी,आभार.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

अच्छी जानकारी!

वाणी गीत ने कहा…

एक और पृथ्वी की जानकारी रोचक लगी . फिर तो एलियन का अस्तित्व भी होगा !!!

अभिषेक मिश्र ने कहा…

महत्वपूर्ण जानकारी.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

रोचक खगोलीय जानकारी.

P.N. Subramanian ने कहा…

नयी और उत्साहवर्धक जानकारी. लेकिन हम तो यहीं ठीक हैं.

दर्शन लाल बवेजा ने कहा…

वाह ....
जाकिर जी यह बताने के लिए धन्यवाद

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 19/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

रेखा ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने ...

आशा जोगळेकर ने कहा…

रोचक जानकारी । अब हमारे पास विकल्प तो हो गया न चाहे वहां रेंगना ही क्यूं ना पडे । इस को हम से साझा करने का बहुत धन्यवाद ।

induravisinghj ने कहा…

रोचक जानकारी पढ़ कर अच्छा लगा...